॥ दोहा ॥
नमो विष्णु भगवान को, सहस्र नाम उचार।
दे दर्शन अपने भक्त को, करो दीन पर प्यार॥
॥ चौपाई ॥
01जय विष्णु जगत के पालनहारे।
सकल सृष्टि के तुम आधारे॥
02जय लक्ष्मीपति दीनदयाला।
शंख चक्र गदा पद्म विशाला॥
03पीताम्बर धारी शोभा सारा।
चार भुजा रूप मनोहारा॥
🌸 जय नारायण 🌸
04करत सदा भक्तन की रखवारी।
नाशत असुर अतुलित बलधारी॥
05मत्स्य कूर्म वराह नरसिंहा।
वामन परशु राम रघुवंशा॥
06बलराम कृष्ण कल्कि अवतारा।
दश रूपों में जगत उजियारा॥
07हिरण्यकश्यप वध कर डारा।
भक्त प्रहलाद को दिया सहारा॥
08बलि से छल कर भूमि नापी।
तीन पग में जग को मापी॥
विष्णु सहस्रनाम
09गजराज जब विपत्ति में परा।
भागि आये तुम तुरत उबारा॥
10द्रौपदी की लाज जब गई।
चीर बढ़ाय मान रखि लई॥
11क्षीरसागर में शेष-शयन।
लक्ष्मी सेवत चरण प्रतिदिन॥
12सुर-असुर मिल सागर बिलोयो।
अमृत निकसि देवन को दियो॥
13शंखासुर मधु कैटभ मारे।
त्रिभुवन को भय दुख निवारे॥
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14तुलसी दल प्रिय तुमहिं सुहाई।
बिना तुलसी पूजा न भाई॥
15नारद ऋषि तुम्हरे यश गावें।
ब्रह्मा-शिव शीश नवावें॥
16योगमाया तुम्हरी अपरम्पारा।
सृष्टि रचाय धरो अवतारा॥
17कमल नयन मुखकमल सुहाना।
अति प्रिय भक्त तुम्हें पहचाना॥
18भक्त बिदुर विदुरानी माँहीं।
साग खाय तुमने आनन्द पाहीं॥
जय जगदीश
19सुदामा के चावल स्वीकारे।
दरिद्र मित्र को धनपति कारे॥
20गोपियन संग रास रचाया।
ब्रज में प्रेम भक्ति उजियाया॥
21गीता ज्ञान अर्जुन को दीन्हा।
धर्म-रक्षा का मार्ग चीन्हा॥
22सर्वव्यापी सर्वशक्तिमाना।
अनन्त रूप तुम्हारो जाना॥
23गरुड़ वाहन नीलकाय धारी।
वैकुण्ठ में सदा विहारी॥
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24जो तुमको एकाग्र ध्यावें।
संसार सागर से तर जावें॥
25राम नाम तारक मंत्र तुम्हारा।
जपत सब पापों का होय निवारा॥
26जो नर नित्य ध्यान तुम्हरो धरे।
भव के बंधन सकल कटि जाय॥
27ब्रह्म रूद्र शेष तुम्हरे गुण गावें।
चार वेद यश तुम्हारो गावें॥
28जो विष्णु चालीसा नित गावे।
सब विपत्ति से मुक्ति पावे॥
ॐ नमो नारायणाय
29रोग दोष दारिद्र्य नशावें।
जो विष्णु का नाम जपावें॥
30संकट से भक्तन को बचावें।
मोक्ष का मार्ग तुम दिखलावें॥
31एकादशी व्रत जो पालन करे।
वैकुण्ठ धाम को वो जन वरे॥
32तुलसी माला जो गले धरावे।
विष्णु लोक में वास वो पावे॥
33पुण्य नदी में स्नान जो करते।
तुम्हरे ध्यान से पाप जो हरते॥
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34विष्णु पुराण जो पाठ सुनावे।
जन्म-जन्म के पाप मिटावे॥
35भक्ति-भाव जो मन में आनी।
पूरण करते मनोकामनी॥
36संसार में जो दुखी जन होई।
तुम्हरो ध्यान करे सुखी सोई॥
37धर्म न्याय के रक्षक भगवाना।
अधर्म का विनाश कर जाना॥
38अनन्य शरण जो तुम्हरी लेई।
भव सागर से पार कर देई॥
🌸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🌸
39विष्णु नाम जो नित्य जपावे।
इच्छित फल मनोरथ पावे॥
40सेवक सदा तुम्हारो दासा।
पूरण करो मन की आसा॥
॥ दोहा ॥
जय विष्णु जय जगपालक, भक्तन के आधार।
दुःख हरो सुख दीजिये, करो कृपा अपार॥
॥ जय विष्णु — ॐ नमो नारायणाय ॥
🌸 फल: विष्णु चालीसा का पाठ प्रतिदिन करने से समस्त पापों का नाश होता है, रोग-दोष दूर होते हैं। एकादशी के दिन व्रत के साथ पाठ करने से विशेष फल मिलता है। भगवान विष्णु की भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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