॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर कर, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहुँ विनय महाराज।
करहुँ कृपा हे रवि तनय, राखहुँ जन की लाज॥
॥ चौपाई ॥
01जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा तन श्याम विराजे। माथे मुकुट रत्न-जटा साजे॥
02परम विचित्र प्रभु की लीला। जग में विचरत रहत महाशीला॥
कभी न विसरत भक्त की आशा। पूरण करत सकल अभिलाषा॥
03काक वाहन पर सुशोभित भारी। कृष्ण वसन छवि अतिशय न्यारी॥
तेल चढ़ावत जो नित हारी। दूर होत विपदा अति भारी॥
04सूर्य सुत शनिदेव महाबली। छाया माता के कोखजन अली॥
यम के अनुज जगत में माना। न्याय-धर्म के रखवाले जाना॥
05देवन जब जब शरण पुकारा। तब तब दुखहर्ता भव सारा॥
असुर-सेना जब त्राहि मचाई। शनि कोप से सभी पछताई॥
ॐ
06नाम सुनत ही भय नर पाई। पर भक्तन को नित सुखदाई॥
जो नित्य नेम शनि नाम जपाता। शनि कृपा उसको नित आता॥
07रवि तनय शनि सबल बलवाना। जगत पिता का रूप विशाला॥
धनुर्धारी तूणीर लगाए। सुर नर मुनि सब शीश नवाए॥
08महादशा जब शनि की आवे। जन मन में भय त्रास समावे॥
पर जो भक्ति भाव मन धारे। शनिदेव उसके सब बिपद निवारे॥
09साढ़े साती की जब बेला। जग में छाए कष्टों का मेला॥
पर शनि भक्त को कभु न छोड़े। सकल कष्ट को दूर मरोड़े॥
10दान पुण्य जो नित करे सोई। शनि उसको कभी न मारे जोई॥
काले तिल तेल उड़द दाना। चढ़ाओ शनि को मन में जाना॥
ॐ नमः शनये
11नव रत्न में नीलम अति प्यारा। शनि का प्रिय रत्न संसारा॥
विधि विधान से जो धारे भाई। शनि की कृपा उसको मिली आई॥
12शनिश्चर व्रत जो कोई करता। मनवांछित फल नित उसको मिलता॥
शनिवार को पीपल पूजावे। शनि संकट सब दूर भगावे॥
13काल-सर्प दोष भी जाई। शनि दर्शन से दूर होई॥
राहु केतु के कोप निवारे। शनि की भक्ति से सब सुधारे॥
14जन्मपत्री में शनि यदि भारी। करहु तो उसकी भक्ति पुजारी॥
नीले फूल तेल नित चढ़ावो। शनि महाराज को मन से लावो॥
15मंदिर शनि के नित्य जो जावे। सुख संपत्ति वो नित ही पावे॥
शिंगणापुर धाम का ध्यान। करत जन पावे विधि मेहरबान॥
ॐ
16त्रयोदशी और शनिवार वारे। करो शनिदेव की पूजा प्यारे॥
दीप जलाओ तेल चढ़ावो। शनि की महिमा नित्य गावो॥
17शनि चालीसा पाठ जो गावे। जीवन में नित सुख समृद्धि पावे॥
जो नित नेम से पाठ करे सोई। शनि कृपा उसके उर भरे होई॥
18ऋणिया जो हो कर्ज में डूबा। शनि भक्ति से कर्ज मिटे रूबा॥
पुत्र हीन इच्छा धरे जो भाई। शनि कृपा से पुत्र मिले आई॥
19रोगी जो शनि पूजन करता। कष्ट रोग सब जल्दी टरता॥
नेम धर्म से जीवन चलता। शनि कोप से कभु नहीं जलता॥
20नमो नमो शनिदेव की जाई। अरिष्ट निवारण हेत सहाई॥
भक्त जनन के संकट हारे। जय जय शनिदेव भयहारे॥
ॐ शं शनये नमः
21अस्तुति शनिदेव की गाई। भवसागर से पार लगाई॥
सब संकट हर कृपा धारी। जय जय जय शनिदेव दयाली॥
॥ दोहा ॥
नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीशा॥
ॐ नमः शनिश्चराय
भगवान शनिदेव की महिमा अपार है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन शनि चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं। शनिदेव न्याय के देवता हैं — वे कर्म के अनुसार फल देते हैं। उनकी कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है एवं आत्मा को शांति मिलती है।
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