Home Tales of Gods & Legends Samudra Manthan — The Churning of the Cosmic Ocean
Hindu Legend  •  किंवदंतियाँ

Samudra Manthan — The Churning of the Cosmic Ocean

The gods had lost their immortality after being cursed by the sage Durvasa. Lord Vishnu advised them to churn the great cosmic ocean. But such an undertaking required an uneasy truce with their ancient enemies, the asuras…

Creation Amrit Balance
  Full Story

बहुत पहले की बात है, महर्षि दुर्वासा ने इंद्र को एक दिव्य माला भेंट की, जिसे इंद्र ने लापरवाही में अपने हाथी से कुचलवा दिया। क्रुद्ध दुर्वासा ने समस्त देवगणों को श्राप दिया — उनका अमरत्व छिन जाएगा। श्राप के प्रभाव से दैत्यों ने अवसर पाकर दुर्बल देवताओं को पराजित कर दिया और तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया।

भगवान विष्णु ने देवताओं को परामर्श दिया कि वे महान ब्रह्मांडीय समुद्र — क्षीरसागर — का मंथन करें और अमृत प्राप्त करें। असुरों के साथ युद्ध-विराम की संधि हुई। मंदराचल पर्वत को मंथन-दंड बनाया गया और नागराज वासुकि को रस्सी। पर्वत जब समुद्र में डूबने लगा तब विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर उसे अपनी पीठ पर धारण किया।

मंथन जारी रहा और समुद्र से एक-एक करके अनेक रत्न प्रकट हुए — कामधेनु, कल्पवृक्ष, धन की देवी लक्ष्मी, दिव्य वैद्य धन्वंतरि जो अमृत-कलश लेकर आए, और न जाने कितने अद्भुत पदार्थ।

किंतु तब हालाहल विष उठा — इतना घातक कि उसकी एक बूँद समस्त सृष्टि का नाश कर सकती थी। देवता और दैत्य भय से भाग खड़े हुए। भगवान शिव अकेले आगे बढ़े और उन्होंने वह विष पी लिया। माता पार्वती ने तत्काल उनका कंठ थाम लिया ताकि विष उदर में न उतरे। विष कंठ में ठहर गया और उसने शिव का कंठ नीला कर दिया — तभी से वे नीलकंठ कहलाए।

अंत में धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए। समुद्र मंथन की यह कथा सिखाती है कि महान उपलब्धियाँ महान प्रयास, परस्पर सहयोग, और जीवन के विष तथा अमृत — दोनों को समभाव से स्वीकार करने की क्षमता से ही प्राप्त होती हैं।

  Moral & Teaching

Great achievements require cooperation between opposing forces. And from every churning of life — both poison and nectar emerge. The wise accept both with equanimity.

  Theme & Significance

Cosmic Cooperation & Balance of Forces

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