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Ganesha & the Broken Tusk — The Sacred Scribe

When sage Vyasa sat to dictate the Mahabharata, he needed a scribe who could write without pause. He chose Lord Ganesha — but Ganesha set one condition that would cost him dearly…

Ganesha Wisdom Sacrifice
  Full Story

जब महान ऋषि वेदव्यास को महाभारत का दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ — इतिहास का सबसे विशाल महाकाव्य — तब उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता है जो उनकी गति से लिख सके। कार्य अद्वितीय था: एक लाख श्लोक, अठारह पर्व, एक समूची सभ्यता का ज्ञान।

ब्रह्मा ने व्यास को गणेश के पास भेजा। बुद्धि के देव, गजमुख गणेश, सहमत हुए — किंतु एक शर्त के साथ: “मैं लिखूँगा — किंतु यदि आपने एक पल भी रुककर सोचा, तो मैं रुक जाऊँगा।” व्यास भी समान प्रज्ञा के धनी थे, उन्होंने पलटकर कहा: “स्वीकार है — किंतु प्रत्येक श्लोक का अर्थ भलीभाँति समझे बिना आप लिखेंगे नहीं।”

व्यास ने तब ऐसे गूढ़ दार्शनिक श्लोक बोले कि स्वयं गणेश को रुककर उनके अर्थ पर विचार करना पड़ा। उन बहुमूल्य विरामों में व्यास अगले श्लोक रचते रहे — और इस प्रकार यह महाकाव्य आगे बढ़ता रहा, दोनों महामनस्वी एक-दूसरे की परीक्षा लेते और परस्पर सम्मान करते हुए।

एक निर्णायक क्षण में व्यास का उच्चारण इतना तीव्र हो गया कि गणेश की लेखनी टूट गई। एक क्षण भी गँवाए बिना गणेश ने अपना दाँत तोड़ा और उसे कलम की तरह उपयोग में लाकर लिखना जारी रखा — अपनी प्रतिज्ञा का एक भी शब्द चूके बिना।

यही कारण है कि गणेश एकदंत — एक दाँत वाले — कहलाते हैं। टूटा हुआ दाँत हमें यह शिक्षा देता है कि ज्ञान, बुद्धि और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता किसी भी व्यक्तिगत बलिदान के योग्य है। इसीलिए गणेश समस्त लेखकों, विद्वानों और उन सभी के शाश्वत संरक्षक हैं जो ज्ञान को काल की सीमाओं से परे आगे ले जाते हैं।

  Moral & Teaching

Commitment to knowledge and truth is worth any personal sacrifice. The greatest wisdom is not just in knowing, but in being willing to give everything to preserve and transmit it.

  Theme & Significance

Wisdom, Sacrifice & Devotion to Knowledge

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