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Hindu Legend  •  किंवदंतियाँ

Durga & Mahishasura — Victory of the Divine

A demon named Mahishasura performed terrible austerities and earned a boon that no man or god could kill him. Armed with this invincibility, he conquered the heavens and drove the gods from their celestial realms…

Durga Shakti Navratri
  Full Story

एक समय महिषासुर नामक दैत्य था — भैंसे के रूप वाला दानव — जिसने भयंकर तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान पाया कि कोई पुरुष या देवता उसे नहीं मार सकता। इस अजेयता के दर्प में उसने स्वर्ग पर आक्रमण किया, इंद्र और समस्त देवगणों को पराजित किया और दिव्य लोकों पर अधिकार कर लिया।

निराश और असहाय देवगण त्रिदेव के पास गए और सहायता की याचना की। यह समझते हुए कि महिषासुर के वरदान में स्त्री का उल्लेख नहीं था, देवताओं ने अपनी समस्त दिव्य ऊर्जाएँ और शक्तियाँ एक ज्योतिर्मय प्रकाश में समाहित कर दीं। उस ब्रह्मांडीय अग्नि से एक अप्रतिम देवी प्रकट हुईं — तेजस्वी, निर्भीक, दस भुजाओं से युक्त, जिनमें से प्रत्येक में एक देवता का दिया हुआ अस्त्र था। वे थीं दुर्गा — अजेया।

सिंह पर सवार होकर वे महिषासुर की सेनाओं पर उतरीं, उनका सिंहनाद सुनकर ब्रह्मांड काँप उठा। नौ दिन और नौ रात युद्ध होता रहा। महिषासुर ने अनेक रूप धरे — हाथी, सिंह, फिर अपने विशाल भैंसे के रूप में — किंतु दुर्गा ने हर बार उसे अपनी दिव्य कुशलता से परास्त किया।

दसवें दिन महिषासुर अपने भैंसे के रूप से बाहर आया। दुर्गा ने उसे अपने त्रिशूल से भेदा और अपना भाला उसकी छाती में उतार दिया। दैत्य धराशायी हो गया और स्वर्ग में आनंद-उत्सव मच गया। यह महान विजय नवरात्रि — देवी की नौ रातों — और दसवें दिन विजयादशमी के रूप में मनाई जाती है, जो आज भी समूची हिंदू संस्कृति में गूँजती है।

  Moral & Teaching

Evil that believes itself invincible always contains the seed of its own destruction. The Divine Mother rises whenever the balance of dharma is threatened.

  Theme & Significance

Divine Power & Triumph of Good

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